शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाजार में मचे हाहाकार ने निवेशकों की कमर तोड़ दी है। सेंसेक्स और निफ्टी में 1% की भारी गिरावट ने महज एक दिन में निवेशकों के ₹6 लाख करोड़ स्वाहा कर दिए। अगर पिछले तीन सत्रों की बात करें, तो यह घाटा ₹9 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।
बाजार में इस "ब्लैक फ्राइडे" जैसी स्थिति के पीछे मुख्य रूप से पश्चिम एशिया का तनाव और कच्चे तेल की उबलती कीमतें जिम्मेदार हैं। आइए जानते हैं वे 5 बड़ी वजहें जिन्होंने बाजार का मूड बिगाड़ा:
1. अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज की घेराबंदी
बाजार में बिकवाली का सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता गतिरोध है। शांति समझौते की उम्मीदें धूमिल होती दिख रही हैं। वॉशिंगटन द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) की घेराबंदी और ट्रंप के कड़े बयानों ने युद्ध की आहट तेज कर दी है। चूंकि दुनिया का एक बड़ा तेल व्यापार इसी रास्ते से होता है, इसलिए इसकी बंदी ने वैश्विक सप्लाई चेन पर संकट खड़ा कर दिया है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में 'आग'
पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें इस हफ्ते करीब 18% तक बढ़ गई हैं। मार्च और अप्रैल के दौरान कीमतें कई बार $100 प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का 80% से ज्यादा आयात करता है, ऐसे में महंगा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महंगाई और चालू खाता घाटे (CAD) का बड़ा खतरा है।
3. FIIs की भारी बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं। अप्रैल के शुरुआती हफ्तों में ही FIIs ने ₹10,000 करोड़ से ज्यादा की नेट सेलिंग की है। वैश्विक अनिश्चितता के दौर में विदेशी निवेशक उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश जैसे सोने और अमेरिकी डॉलर की ओर भाग रहे हैं।
4. आईटी (IT) सेक्टर के कमजोर नतीजे
बाजार की गिरावट में आईटी दिग्गजों का भी बड़ा हाथ रहा। हाल ही में आए इंफोसिस (Infosys) जैसे बड़े शेयरों के चौथी तिमाही (Q4) के नतीजे बाजार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। नतीजों के बाद ब्रोकरेज फर्मों ने इनके टारगेट प्राइस घटा दिए, जिससे आईटी इंडेक्स में भारी बिकवाली देखी गई।
5. बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को टालने के संकेतों और वैश्विक अस्थिरता के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में मजबूती आई है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो भारतीय रुपया कमजोर होता है, जिससे विदेशी निवेशकों का मुनाफा कम हो जाता है और वे शेयर बेचकर बाहर निकलने लगते हैं।
बाजार का हाल: एक नजर में
| इंडेक्स |
गिरावट (आज) |
3 दिन की कुल गिरावट |
निवेशकों का नुकसान (3 दिन) |
| सेंसेक्स |
~1,000 अंक (1%) |
~2,400 अंक (3%) |
₹9 लाख करोड़ |
| निफ्टी 50 |
~250 अंक (1%) |
~2.6% |
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