आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गोवा के कारापुर-श्रवण गांव में अपनी जमीन, संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए आंदोलन कर रहे ग्रामीणों के प्रति एकजुटता प्रकट की है। अरविंद केजरीवाल पार्टी की गोवा प्रभारी आतिशी के साथ विशेष रूप से दिल्ली से गोवा पहुंचे और धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी मांगों का समर्थन किया। इस दौरान उन्होंने गोवा की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार की नीतियों पर जमकर तीखे प्रहार किए।
भाजपा सरकार पर बिल्डरों के लिए काम करने का आरोप
ग्रामीणों को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाया कि गोवा की मौजूदा भाजपा सरकार स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी कर बड़े-बड़े बिल्डरों के फायदे के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आज स्थिति ऐसी हो गई है कि गोवा के मूल निवासियों को अपनी ही पुरखों की जमीन और प्राकृतिक संपदा को बचाने के लिए सड़कों पर उतरकर संघर्ष करना पड़ जा रहा है।
केजरीवाल ने भावुक और आक्रामक अंदाज में कहा:
"गोवा धरती की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। इसकी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण ही इसकी असली पहचान हैं। लेकिन आज टीसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) एक्ट के सेक्शन 39ए के तहत जिस तरह से अंधाधुंध लैंड यूज (भूमि उपयोग) बदलने की परमिशन दी जा रही है, उसमें हितों का गंभीर टकराव साफ नजर आता है।"
"आप" की सरकार बनते ही रद्द होंगे सारे प्रोजेक्ट: केजरीवाल का वादा
गोवा के लोगों को एक बड़ा राजनीतिक भरोसा देते हुए आम आदमी पार्टी के मुखिया ने ऐलान किया कि राज्य में 'आप' की सरकार बनते ही जनविरोधी फैसलों को पूरी तरह पलट दिया जाएगा। उन्होंने वादा किया कि भविष्य में सरकार आने पर धारा 39(ए) और इसके तहत अब तक दी गई सभी विवादित अनुमतियों को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाएगा।
केजरीवाल ने सख्त लहजे में कहा कि "गोवा बिकने के लिए नहीं है।" उन्होंने घोषणा की कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनते ही स्थानीय लोगों की इच्छा के विरुद्ध शुरू किए गए सभी बड़े और विवादित हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को खत्म कर दिया जाएगा। भविष्य में गोवा के भीतर कोई भी विकास कार्य थोपा नहीं जाएगा, बल्कि वहां के स्थानीय नागरिकों और 'ग्राम सभाओं' की सहमति और सुझावों के आधार पर ही विकास की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
पर्यावरण और स्थानीय संस्कृति बचाने की जंग
कारापुर-श्रवण गांव में चल रहा यह धरना प्रदर्शन इस बात का प्रतीक है कि गोवा के ग्रामीण अब अपनी जमीनों के कंक्रीट के जंगलों में बदलने के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। अरविंद केजरीवाल और आतिशी के इस आंदोलन में शामिल होने से स्थानीय ग्रामीणों का हौसला काफी बढ़ गया है। वहीं, इस दौरे ने गोवा की राजनीति में पर्यावरण और स्थानीय अधिकारों के मुद्दे को एक बार फिर से मुख्यधारा के केंद्र में ला खड़ा किया है।