नासा के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई बम धमाका, मानव निर्मित सैटेलाइट या अंतरिक्ष का कोई कचरा (Space Debris) नहीं था। यह पूरी तरह से एक प्राकृतिक घटना थी, जो अंतरिक्ष से आए एक उल्कापिंड (Meteor) के कारण हुई।
दोपहर 2:06 बजे वायुमंडल में एंट्री
नासा के डेटा के मुताबिक, यह उल्कापिंड स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 2 बजकर 6 मिनट पर पृथ्वी के वायुमंडल (Atmosphere) में दाखिल हुआ था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस खगोलीय चट्टान ने बोस्टन के पास स्थित साउथ शोर (South Shore) क्षेत्र के ठीक ऊपर आसमान से पृथ्वी के सुरक्षा कवच (वायुमंडल) में प्रवेश किया था।
क्यों हुआ 'डबल बूम' का जोरदार धमाका?
जब कोई उल्कापिंड अंतरिक्ष के शून्य से निकलकर पृथ्वी के घने वायुमंडल में अत्यधिक गति (हजारों किलोमीटर प्रति घंटा) से प्रवेश करता है, तो हवा के भारी घर्षण (Friction) और दबाव के कारण वह एक भीषण आग के गोले (Fireball) में बदल जाता है।
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ध्वनि की रफ्तार से तेज गति: जब इस खगोलीय पिंड की गति ध्वनि की रफ्तार (Speed of Sound) को पार कर गई, तो हवा में एक जोरदार शॉकवेव (Shockwave) पैदा हुई।
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सोनिक बूम (Sonic Boom): इसी शॉकवेव के कारण जमीन पर मौजूद लोगों को 'डबल बूम' यानी दो लगातार तेज धमाके सुनाई दिए। वायुमंडल के अत्यधिक दबाव को न झेल पाने के कारण यह उल्कापिंड जमीन पर गिरने से पहले ही हवा में ही पूरी तरह टूटकर नष्ट हो गया।
नासा और स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि इस घटना से किसी भी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है। विज्ञान के लिहाज से इसे एक सामान्य लेकिन बेहद दुर्लभ और रोमांचक घटना माना जा रहा है।